मांझांगढ़ प्रखंड में साइबर अपराधियों की गतिविधियां तेजी से बढ़ गई हैं। अपराधी खुद को ब्लॉक स्टाफ या अस्पताल का कर्मचारी बताकर ग्रामीणों के मोबाइल पर कॉल कर रहे हैं और उनके खातों से पैसा उड़ाने का प्रयास कर रहे हैं। खासकर आंगनबाड़ी सेविकाओं, आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम से जुड़े ऑनलाइन कार्यों का हवाला देकर लोगों से ओटीपी मांगकर ठगी की जा रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वे, टीकाकरण और अन्य विभागीय कार्यों के लिए आंगनबाड़ी सेविकाओं, आशा और एएनएम द्वारा लाभुकों का आधार नंबर व मोबाइल नंबर लिया जाता है। वहीं पोषाहार वितरण के लिए एफआरएस प्रक्रिया में भी आधार और मोबाइल नंबर आवश्यक होता है। इसी का फायदा उठाकर साइबर अपराधी लोगों को छह-छह हजार रुपये देने का झांसा देकर ओटीपी मांग रहे हैं। भोले-भाले ग्रामीण इनके जाल में फंसकर अपनी जमा पूंजी गंवा रहे हैं। ठगी के बाद अपराधी इस्तेमाल किए गए नंबर बंद कर नए नंबर से कॉल करने लगते हैं।

इस स्थिति के कारण अब कई ग्रामीण ऑनलाइन कार्यों के लिए अपना मोबाइल नंबर और आधार देने से कतराने लगे हैं, जिससे सेविकाओं, आशा और एएनएम को काम करने में कठिनाई हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अपराधियों के पास लाभुकों के बच्चों के नाम, सेविका और आशा का नाम जैसी जानकारी होना गंभीर चिंता का विषय है। लोगों ने डाटा लीक की आशंका जताते हुए इसकी जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

मांझा बाल विकास परियोजना की प्रखंड समन्वयक अंशु ने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा किसी भी योजना की राशि के लिए कभी भी कॉल नहीं किया जाता। सभी लाभ सीधे लाभुक के खाते में भेजे जाते हैं। कॉल कर ओटीपी मांगने वाले साइबर अपराधी हैं।

वहीं मांझा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. तारिक इब्राहिम ने भी कहा कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रोत्साहन राशि सीधे खाते में भेजी जाती है, इसके लिए किसी को कॉल नहीं किया जाता। उन्होंने लोगों से अपील की कि पैसे का लालच देकर कॉल करने वालों के झांसे में न आएं और ऐसे नंबरों की सूचना तुरंत पुलिस प्रशासन को दें, ताकि साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।