मांझागढ़/गोपालगंज।
जमाबंदी सुधार और अलगाव कराने में लोगों को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राजस्व कर्मियों की ओर से जमाबंदी धारकों और मृत धारकों के उत्तराधिकारियों को आवेदन प्रक्रिया व आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी दी जा रही है।
जानकारी के अनुसार,
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वंशावली, खतियान और मृत्यु प्रमाण पत्र लगाने पर जमाबंदी हिस्से के अनुसार अलग की जा सकती है।
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यदि खतियान में अंकित खाता-खेसरा ऑनलाइन पंजीकृत नहीं है, तो चौहदी के आधार पर आवेदन देकर सुधार संभव है।
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मृत धारकों के उत्तराधिकारी वंशावली और खतियान संलग्न कर नाम दर्ज कराने हेतु आवेदन कर सकते हैं।
मुख्य समस्या
लोगों को सबसे बड़ी परेशानी खतियान की नकल पाने में हो रही है। कई धारकों के रिकॉर्ड पन्ने फट चुके हैं, जिससे खतियान की नकल उपलब्ध नहीं हो पा रही। वहीं, ऑनलाइन नकल निकालने के लिए हल्का, भाग संख्या और पृष्ठ संख्या की जानकारी जरूरी है, जो अधिकांश लोगों के पास नहीं है।
इसके अलावा, ऑनलाइन पंजीकरण में भी त्रुटियाँ हैं—
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कई जगह केवल जमाबंदी नंबर और रकबा दर्ज है,
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लेकिन खाता-खेसरा अंकित नहीं किया गया है।
सवाल और मांग
लोगों का कहना है कि जब जिला स्तर पर रिकॉर्ड क्षतिग्रस्त हो गया है, तो अंचल स्तर से खतियान की नकल उपलब्ध कराने की व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए।
यदि ऑनलाइन रिकार्ड पूर्ण और सही ढंग से अपडेट होते, तो आज लोगों को राजस्व अभियान के तहत जमाबंदी सुधार और अलगाव के लिए महीनों जिला का चक्कर नहीं लगाना पड़ता।
ग्रामीणों की मांग है कि सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि सभी जमाबंदी धारक समय पर लाभ उठा सकें और आसानी से अपने नाम पर सुधार या अलगाव करा सकें।
