ईरान और इस्राइल के बीच बढ़ते संघर्ष का असर अब कुशीनगर जिले के कई परिवारों पर भी दिखाई देने लगा है। खाड़ी देशों में काम करने गए जिले के कई प्रवासी कामगार वहां फंस गए हैं। बमबारी, मिसाइलों की आवाज और गूंजते सायरनों के बीच उनकी रातें भय में गुजर रही हैं, जबकि इधर गांवों में बैठे परिजनों की चिंता भी लगातार बढ़ती जा रही है।

दरअसल, 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद कई हवाई सेवाएं बंद कर दी गई हैं। इसके चलते दुबई, सऊदी अरब और ओमान जैसे देशों में काम कर रहे भारतीयों की वतन वापसी पर संकट खड़ा हो गया है। एयर इंडिया और एमिरेट्स जैसी प्रमुख एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें स्थगित कर दी हैं, जिससे उन प्रवासियों की उम्मीदें टूट गई हैं जिन्होंने होली और ईद के लिए पहले से टिकट बुक कराए थे।

कप्तानगंज तहसील क्षेत्र के सिधावट गांव के तीन कामगार दुबई में फंसे हुए हैं। गांव निवासी रामनेत सिंह की पत्नी आरती देवी ने बताया कि उनके पति ने होली पर घर आने के लिए टिकट कराया था, लेकिन उड़ान रद्द होने के कारण अब उनका आना संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि पति से फोन पर मुश्किल से बात हो पा रही है और परिवार में सभी लोग उनकी सुरक्षित वापसी को लेकर चिंतित हैं।

इसी गांव की सुनीता देवी ने बताया कि उनके पति बृजेश सिंह भी दुबई में काम करते हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से संपर्क बहुत कम हो गया है। उन्होंने भी होली पर घर आने के लिए टिकट कराया था, लेकिन अब हवाई सेवाएं बंद होने से उनकी वापसी अनिश्चित हो गई है।

दुबई में ही काम कर रहे गणेश गुप्ता के पिता शंभू गुप्ता ने बताया कि बेटे ने महीनों पहले होली पर घर आने की योजना बनाई थी, लेकिन अब उसने फोन पर बताया है कि युद्ध के कारण वह फिलहाल वापस नहीं आ पाएगा।

दुदही क्षेत्र के ठाढ़ी भार गांव निवासी उमेश पांडेय ने बताया कि उनका बेटा अशोक पांडेय ओमान की एक कंपनी में कार्यरत है। युद्ध की स्थिति के कारण कंपनी का काम बंद हो गया है और कई कर्मचारी सुरक्षा के लिए बंकर में छिपे हुए हैं। उनसे सीधे बात नहीं हो पा रही, लेकिन बेटे की ओर से कभी-कभी फोन आ जाता है।

इधर जिले के कई गांवों में माहौल बदला हुआ है। घरों में होली की तैयारियां तो हो रही हैं, लेकिन लोगों के चेहरों पर चिंता साफ दिखाई दे रही है। परिजनों का कहना है कि जब तक उनके बेटे या पति सुरक्षित घर नहीं लौट आते, तब तक त्योहार की खुशियां अधूरी ही रहेंगी।

बनकटा बाजार क्षेत्र के कोइलसवा बुजुर्ग गांव निवासी योगेंद्र प्रसाद ने बताया कि गांव के कई युवक दुबई में काम करते हैं। वहां से मिली जानकारी के अनुसार जिस इलाके में वे रह रहे हैं, उसके आसपास बमबारी और मिसाइल हमलों की आवाज सुनाई दे रही है, जिससे लोगों में भय का माहौल है।

नदवाविशुनपुर गांव निवासी अमित सिंह भी सऊदी अरब में फंसे हुए हैं। उनके भाई सत्यम सिंह ने बताया कि फोन पर बातचीत हो रही है, लेकिन सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। परिवार के लोग लगातार टीवी और मोबाइल के जरिए वहां की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।

वहीं पडरौना शहर के गड़रु नगर निवासी सुनील शुक्ला सऊदी अरब जाने के लिए मुंबई पहुंचे थे, लेकिन 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद हवाई सेवाएं बंद हो गईं और उन्हें वापस लौटना पड़ा। उनका कहना है कि जब तक दोनों देशों के बीच युद्ध विराम नहीं हो जाता, तब तक विदेश जाना संभव नहीं है।

उधर जिला प्रशासन भी इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अलर्ट हो गया है। प्रशासन ने खाड़ी देशों में फंसे जिले के कामगारों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। इसके लिए परिजनों से कहा गया है कि वे अपने क्षेत्र के लेखपाल को पूरी जानकारी दें, ताकि शासन स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जा सके और जरूरत पड़ने पर लोगों की मदद की जा सके।