गोपालगंज शहर के ब्लाक कॉलोनी स्थित सम्राट अशोक भवन में रविवार को जनता दल (यूनाइटेड) के जिलाध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर आयोजित बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। चुनाव प्रक्रिया शुरू होते ही कार्यकर्ता दो गुटों में बंट गए और आरोप-प्रत्यारोप के बीच माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि चुनाव कराने पहुंचे पदाधिकारी भी दो खेमों में बंटे नजर आए और अंततः पर्यवेक्षक को चुनाव प्रक्रिया स्थगित करनी पड़ी।

रविवार को आयोजित बैठक में जिलाध्यक्ष पद के चुनाव के लिए पांच प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल किया। चुनावी पर्यवेक्षक सतीश कुमार की मौजूदगी में नामांकन की प्रक्रिया पूरी की गई। नामांकन के बाद प्रत्याशियों के समर्थन को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते नारेबाजी और हंगामे में बदल गई। सभागार में शोर-शराबा बढ़ने से माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया।

स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख चुनावी पर्यवेक्षक सतीश कुमार सभागार से बाहर निकल गए। पर्यवेक्षक के बाहर जाने के बाद निर्वाची पदाधिकारी द्वारा आदित्य शंकर शाही को पुनः जिलाध्यक्ष मनोनीत किए जाने की घोषणा कर दी गई। इस घोषणा के बाद माहौल और गरमा गया तथा विरोधी गुट के कार्यकर्ताओं ने कड़ी नाराजगी जताई।

जिलाध्यक्ष पद के दावेदार संजीत कुमार चौबे ने आरोप लगाया कि पर्यवेक्षक की अनुपस्थिति में जिलाध्यक्ष घोषित करना पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में भेदभाव किया गया और लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव नहीं कराया गया। उन्होंने निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग करते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं की भावनाओं की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

दूसरी ओर एक गुट के कार्यकर्ताओं ने आदित्य शंकर शाही को जिलाध्यक्ष बनाए जाने का समर्थन करते हुए उन्हें बधाई दी और पार्टी संगठन को मजबूत करने का भरोसा जताया। वहीं विरोधी गुट के कार्यकर्ता निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग पर अड़े रहे और उन्होंने पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाया।

इस संबंध में चुनाव पर्यवेक्षक सतीश कुमार ने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए चुनाव फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। पूरे घटनाक्रम की जानकारी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दे दी गई है। उन्होंने कहा कि आगे का निर्णय पार्टी नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा।

बताया जा रहा है कि मामले पर अंतिम फैसला पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के स्तर से लिया जा सकता है। इस घटना के बाद जिले की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है और जदयू कार्यकर्ताओं के बीच खींचतान खुलकर सामने आ गई है।