गोपालगंज में हाल के दिनों में बाइक चोरो का आतंक बढ़ गया है। यहाँ आये दिन समाहरणालय परिसर से पलक झपकते ही बाइक चोरी कर ली जा रही है। ताजा मामला नगर थाना के समाहरणालय परिसर से एक कांग्रेस नेता हाशिब अख्तर खान,सामाजिक सुरक्षा के लिपिक का बाइक चोरों ने चोरी कर लिया है। नगर थाना में प्रथमिकी दर्ज कराया गया ।लेकिन पुलिस ऐसे चोरो को अबतक पकड़ना तो दूर पहचान भी नहीं कर सकी है। हसीब अख्तर खान ने बताया कि समाहरणालय में अपने निजी काम से आया था जब काम कर के वापस आया तो मेरा बाइक चोरी कर लिया गया है । समाहरणालय परिसर में हर जगह सीसीटीवी लगा है वावजूद पुलिस बाइक चोरों का सुराग नही कर पा रही है नगर थाने में आवेदन देकर बाइक चोरी का सनहा दर्ज कराया। समाहरणालय में सामाजिक सुरक्षा के लिपिक के बड़ा बाबू ने बताया कि दो साल पहले मेरा ग्लैमर बाइक चोरी हुआ। नगर थाने में एफआईआर कराया दर्ज लेकिन अभी तक मेरा बाइक बरामद नही हुआ। उन्होंने ने बताया कि दूसरी बाइक लेकर ऑफिस आते है हमेशा भय रहता है कि बाइक चोरी नही हो जाये। काम करे कि अपना बाइक पकड़कर सुरक्षा करे। समाहरणालय के कर्मियों का बाइक सुरक्षित नही है। तो आम लोगों का क्या होगा।दो हफ्ता पहले एक पत्रकार की हेलमेट चोरों ने चोरी कर लिया

गोपालगंज। जिले में बाइक चोरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। नगर थाना क्षेत्र के समाहरणालय परिसर में एक बार फिर चोरी की बड़ी घटना सामने आई है। कांग्रेस नेता एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के लिपिक हाशिब अख्तर खान की बाइक अज्ञात चोरों ने दिनदहाड़े चोरी कर ली।

🚨 शिकायत के बाद भी नतीजा शून्य

हाशिब अख्तर खान ने नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है, लेकिन अब तक चोरों का न तो सुराग मिला है और न ही पुलिस उन्हें पहचान पाई है। पीड़ित नेता का कहना है कि वे किसी निजी काम से समाहरणालय आए थे और काम निपटाकर लौटे तो देखा कि उनकी बाइक गायब है।

🎥 सीसीटीवी से भी मदद नहीं

समाहरणालय परिसर में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद अब तक पुलिस को कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है।

📌 पुरानी घटनाएं भी अनसुलझी

समाहरणालय के सामाजिक सुरक्षा विभाग के बड़े बाबू ने बताया कि करीब दो साल पहले उनकी ग्लैमर बाइक चोरी हुई थी। नगर थाना में एफआईआर दर्ज हुई लेकिन आज तक बाइक बरामद नहीं हुई। मजबूरी में वे दूसरी बाइक से ऑफिस आते हैं और हमेशा यह डर बना रहता है कि कहीं फिर चोरी न हो जाए।

🏍 पत्रकार भी बने शिकार

करीब दो हफ्ते पहले समाहरणालय में एक पत्रकार का हेलमेट भी चोरी हो गया था। लगातार हो रही इन घटनाओं से कर्मचारी और आम लोग दहशत में हैं और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं

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