गोपालगंज। उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की मांग को लेकर गुरुवार को शहर में ‘समता मार्च’ का आयोजन किया गया। यूजीसी बचाओ संघर्ष मोर्चा के बैनर तले आयोजित इस मार्च में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। मार्च का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को समाप्त करना तथा यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता का संवर्धन) विनियम 2026 को पूर्ण रूप से लागू कराने की मांग उठाना था।

समता मार्च की शुरुआत अंबेडकर चौक से हुई, जो शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होते हुए आगे बढ़ा। मार्च के दौरान प्रतिभागियों ने “जातीय भेदभाव बंद करो, यूजीसी रेगुलेशन लागू करो”, “एससी-एसटी-ओबीसी के अधिकार सुरक्षित करो” और “शिक्षा में समता सुनिश्चित करो” जैसे नारे लगाए। प्रतिभागियों ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर और सम्मानजनक माहौल सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि जनवरी 2026 में अधिसूचित यूजीसी विनियम 2026 का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव को रोकना है। इन विनियमों के तहत प्रत्येक संस्थान में इक्विटी कमेटी या इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेल (ईओसी) की स्थापना, शिकायतों के समयबद्ध निपटारे तथा संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित करने जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। वक्ताओं का कहना था कि पिछले कुछ वर्षों में जाति-आधारित भेदभाव के मामलों में वृद्धि देखी गई है, इसलिए इन नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन बेहद जरूरी हो गया है।

कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र कार्यकर्ता अंजलि ने कहा कि यूजीसी विनियम 2026 सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इसे केवल कागजों तक सीमित न रखकर जमीनी स्तर पर लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देशभर में छात्र संगठन समानता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर आवाज उठा रहे हैं।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष धनंजय ने अपने संबोधन में कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव का मुद्दा गंभीर है और इसे दूर करने के लिए प्रशासनिक जवाबदेही तय करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यूजीसी विनियम 2026 का प्रभावी क्रियान्वयन समय की मांग है।

वरिष्ठ अधिवक्ता रामनाथ साहू ने संविधान के अनुच्छेद 15 और 17 का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा संस्थानों में समानता और गरिमा सुनिश्चित करना देश का संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की अवधारणा को मजबूत बनाने के लिए आरक्षण व्यवस्था, सामाजिक प्रतिनिधित्व और संस्थागत पारदर्शिता को प्रभावी रूप से लागू करना आवश्यक है।

मार्च में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, अधिवक्ता तथा जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने मांग की कि सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में यूजीसी विनियम 2026 को तत्काल लागू किया जाए, जाति-आधारित भेदभाव के प्रति शून्य सहिष्णुता नीति अपनाई जाए तथा इक्विटी सेल और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत बनाया जाए।

समता मार्च शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। आयोजकों ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में वास्तविक समता स्थापित होने तक उनका अभियान लगातार जारी रहेगा।