देवरिया सदर तहसील में 18 अप्रैल 2026 को आयोजित समाधान दिवस के अवसर पर बाल विवाह की रोकथाम को लेकर व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया। आगामी अक्षय तृतीया के मद्देनज़र प्रशासन ने विशेष रूप से लोगों को जागरूक करते हुए बाल विवाह पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित करने की अपील की।
कार्यक्रम में मनोवैज्ञानिक मिनू जायसवाल ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की जानकारी देते हुए बताया कि बाल विवाह कराना या इसमें शामिल होना संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना और दो वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विवाह के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष निर्धारित है।
कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी ने सभी उपस्थित लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई और जनपद को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प दोहराया। जिला प्रोबेशन अधिकारी ने समाज के सभी वर्गों—धार्मिक गुरुओं, संस्थानों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से अपील की कि वे बाल विवाह रोकने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
इसके साथ ही बताया गया कि किसी भी संदिग्ध बाल विवाह की सूचना तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 181 या पुलिस 112 पर दी जा सकती है। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारी, पुलिस प्रशासन, महिला कल्याण विभाग और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
यह अभियान बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को खत्म करने और बच्चों के सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।
