देवरिया।
दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से वैष्णवी सेवा शिक्षण संस्थान, उमानगर द्वारा राजकीय इंटर कॉलेज परिसर में दो दिवसीय “दिव्य कला एवं कौशल प्रदर्शनी” का सफल आयोजन किया गया। यह प्रदर्शनी 10 से 11 फरवरी 2026 तक चली, जिसका उद्देश्य दिव्यांगजनों की प्रतिभा को मंच प्रदान करना और उनके आत्मविश्वास को मजबूत करना था।

कार्यक्रम का भव्य समापन बुधवार को गोरखपुर मंडल के उपनिदेशक दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग अनुप कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुआ। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि दिव्यांगजन किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं, बल्कि अपनी मेहनत और हुनर से समाज में नई मिसाल कायम कर रहे हैं। ऐसे आयोजनों से उन्हें न केवल पहचान मिलती है बल्कि आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी प्राप्त होता है।

प्रदर्शनी में कुल 12 स्टॉल लगाए गए थे, जिनमें दिव्यांगजनों द्वारा तैयार किए गए हस्तशिल्प, सजावटी वस्तुएं, उपयोगी घरेलू सामग्री और कलाकृतियां प्रदर्शित की गईं। आगंतुकों ने इन उत्पादों की जमकर सराहना की और कई लोगों ने खरीदारी भी की, जिससे दिव्यांग कलाकारों का मनोबल बढ़ा।

कार्यक्रम के दौरान खेलकूद प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं। दिव्यांग बच्चों और प्रतिभागियों ने गीत, नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी कला का बेहतरीन प्रदर्शन किया। उनकी प्रस्तुतियों ने मौजूद दर्शकों को भावुक करने के साथ-साथ प्रेरित भी किया।

इस अवसर पर जिला विकास अधिकारी, जिला सेवायोजन अधिकारी, जिला समन्वयक समेकित शिक्षा, कुशीनगर स्थित राजकीय मूक-बधिर बालिका इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य सहित गोरखपुर और देवरिया के कई संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी संस्थाओं ने अपने-अपने स्टॉल के माध्यम से दिव्यांगजनों द्वारा निर्मित उत्पादों को प्रदर्शित किया।

समापन समारोह में मुख्य अतिथि ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों और संस्थाओं को प्रमाण-पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया। अंत में जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के विधिवत समापन की घोषणा की।

यह प्रदर्शनी दिव्यांगजनों की प्रतिभा, संघर्ष और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी, जिसने समाज को यह संदेश दिया कि सही अवसर मिलने पर हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार बेहतर योगदान दे सकता है।