गोपालगंज। जन सुराज उद्घोष यात्रा के तहत प्रशांत किशोर गोपालगंज पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सर्किट हाउस में एक प्रेस वार्ता आयोजित की। पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने भाजपा, राजद और कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया। प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में जन सुराज के प्रयास से ही लोकतंत्र जिंदा हो रहा है। प्रेस वार्ता के बाद वे कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रवाना हो गए।
जन सुराज उद्घोष यात्रा के तहत एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे प्रशांत किशोर ने कहा कि यह जन सुराज के प्रयास की ताकत है कि आज दूसरे राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता जमीन पर जाकर जनता से संवाद स्थापित कर रहे हैं। कांग्रेस की यात्रा पर कटाक्ष करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि 1985 में बिहार में कांग्रेस सत्ताधारी पार्टी थी, लेकिन उसे जागने में 40 साल लग गए। जन सुराज के आने से दूसरे राजनीतिक दलों को यह एहसास हो गया है कि अगर वे काम नहीं करेंगे तो जनता उन्हें नकार देगी।
प्रशांत किशोर ने कहा कि राजद अब मुसलमानों को अपना राजनीतिक बंधुआ मजदूर नहीं समझेगा और न ही बीजेपी और जदयू यह सोच सकती हैं कि हिंदू समाज के कुछ लोग लालू जी के डर से उन्हें ही वोट देंगे। जन सुराज के प्रयास से बिहार में लोकतंत्र फिर से जीवित हो रहा है, जो बिहार की जनता के लिए अच्छी खबर है।
प्रशांत किशोर ने गृह मंत्री अमित शाह से बिहार के बच्चों को उनका हक दिलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि गुजरात की फैक्ट्रियों में गुजराती व्यक्ति को 20 हजार रुपये मजदूरी मिलती है, जबकि बिहार के बच्चों को सिर्फ 12 हजार रुपये दिए जाते हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आगामी बिहार दौरे पर कटाक्ष करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि अब बिहार में चुनाव हैं, इसलिए नवंबर तक अमित शाह जी को सिर्फ बिहार ही दिखेगा। अब नवंबर तक हर केंद्रीय योजना का शिलान्यास बिहार से होगा, किसान सम्मान निधि का पैसा भी बिहार से भेजा जाएगा।
प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर गृह मंत्री को वाकई बिहार और बिहार के बच्चों की इतनी चिंता है, तो गुजरात की फैक्ट्रियों में काम कर रहे बिहार के बच्चों को भी गुजरात के मजदूरों के बराबर मजदूरी दिलवाएं। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार के 11 साल में भाजपा बिहार में एक भी फैक्ट्री नहीं लगा पाई है। इसलिए गृह मंत्री अमित शाह जी से हमारी मांग है कि वे सूरत और मोरबी की फैक्ट्रियों में काम कर रहे बिहार के बच्चों को भी गुजरात के मजदूरों के बराबर मजदूरी दिलवाएं।
