गोपालगंज। जिले के व्यवहार न्यायालय में करीब पांच वर्ष पुराने बहुचर्चित हत्या मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए दो आरोपितों को दोषी करार दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नौ राकेश रंजन सिंह की अदालत ने गोली मारकर हत्या करने के मामले में दोनों दोषियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने प्रत्येक दोषी पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने की स्थिति में दोनों दोषियों को दो वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
अदालत के इस फैसले से पीड़ित परिवार में संतोष का माहौल है। परिजनों ने न्यायालय के निर्णय पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें लंबे इंतजार के बाद न्याय मिला है और अदालत के फैसले से न्याय व्यवस्था पर उनका भरोसा और मजबूत हुआ है।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी अनिल कुमार शर्मा ने सशक्त पैरवी की, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता युधिष्ठिर मिश्र ने अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद यह फैसला सुनाया। इस मामले में कुल 13 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे, जिनके आधार पर अदालत ने आरोपितों को दोषी ठहराया।
अभियोजन के अनुसार नगर थाना क्षेत्र के भीतभेरवा गांव निवासी जाकिर हुसैन ने अपने मित्र उचकागांव थाना क्षेत्र के नवादा परसौनी गांव निवासी अफसर अली से लगभग छह लाख रुपये उधार लिए थे। जब अफसर अली ने अपना पैसा वापस मांगना शुरू किया तो जाकिर हुसैन ने अपने सहयोगी गोरेयाखाल गांव निवासी तबरेज के साथ मिलकर अफसर अली की हत्या की साजिश रच डाली।
घटना 14 अगस्त 2020 की बताई जाती है। उस दिन अफसर अली अपनी गर्भवती पत्नी का इलाज कराने डॉक्टर के पास गया था। इसी दौरान जाकिर हुसैन ने उसे पैसे लौटाने का बहाना बनाकर अपनी बाइक पर बैठाया और मंगलपुर पुल के पास ले गया। वहां पहले से घात लगाए बैठे आरोपितों ने अफसर अली को गोली मार दी और उसकी हत्या कर फरार हो गए। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव बरामद किया और परिजनों को सूचना दी। मृतक के चचेरे भाई के आवेदन पर जादोपुर थाना कांड संख्या 124/20 दर्ज कर मामले की जांच शुरू की गई। पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
पीड़ित पक्ष के वरीय अधिवक्ता राजेश कुमार पाठक ने बताया कि अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत सश्रम आजीवन कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत सात वर्ष का कारावास तथा 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास का प्रावधान रखा गया है।
अदालत के इस फैसले को जिले में न्यायिक प्रक्रिया की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। लंबे समय तक चले इस मुकदमे के बाद आए निर्णय से हत्या जैसे गंभीर अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में न्यायालय का सख्त संदेश भी गया है।
