गोपालगंज। आम बजट 2026 को लेकर विपक्षी दलों और आम लोगों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। आलोचकों का कहना है कि यह बजट महंगाई, बेरोज़गारी और किसानों की समस्याओं पर पूरी तरह मौन है, जबकि आम जनता पर टैक्स का बोझ लगातार बढ़ रहा है।
आलोचकों ने कहा कि देश में खाद्य पदार्थों, रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल और दवाइयों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन बजट में महंगाई से राहत के लिए कोई ठोस योजना प्रस्तुत नहीं की गई। इससे आम लोगों में निराशा है।
युवाओं के मुद्दे पर भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा गया कि हर साल दो करोड़ नौकरियां देने का वादा किया गया था, लेकिन इस बजट में रोजगार सृजन को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई। बेरोज़गार युवा लगातार सवाल उठा रहे हैं कि उन्हें नौकरी कब मिलेगी।
किसानों को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया आई है। आलोचकों का कहना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी पर सरकार चुप है और किसानों की आय दोगुनी करने का वादा केवल कागज़ों तक सीमित रह गया है।
आर्थिक नीति पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि बजट में बड़े कॉरपोरेट घरानों को राहत दी गई है, जबकि आम जनता पर कर का बोझ बढ़ाया जा रहा है। इसे “चंद पूंजीपतियों का बजट” बताया गया।
स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी बजट को कमजोर बताया गया। कहा गया कि सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की कमी है और स्कूल-कॉलेजों की स्थिति खराब है, लेकिन इन क्षेत्रों को प्राथमिकता नहीं दी गई। आलोचकों का मानना है कि यह बजट देश को आत्मनिर्भर बनाने के बजाय कर्ज़ और असमानता की ओर धकेलने वाला है।

