देवरिया। जिले में कृषि विपणन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पीपीपी यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर नई मंडियों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके तहत प्रशासन ने उपयुक्त और विवाद रहित भूमि की तलाश तेज कर दी है। जानकारी के अनुसार, करीब 10 हजार वर्ग फीट जमीन उपलब्ध होने पर नई मंडियों की स्थापना का रास्ता साफ हो जाएगा।
राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के आयुक्त एवं निदेशक इंद्र विक्रम सिंह ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों से जमीन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। यह फैसला मंडी परिषद की 5 जुलाई 2025 को हुई 171वीं बैठक में मुख्यमंत्री के निर्देश पर लिया गया था, जिसमें जरूरत के अनुसार नई मंडियों के विकास पर सहमति बनी थी।
इस योजना के तहत स्थानीय निकाय भूमि उपलब्ध कराएंगे, जबकि मंडी परिषद निर्माण का पूरा खर्च वहन करेगी। भूमि का स्वामित्व संबंधित निकाय के पास रहेगा और मंडी से होने वाली आय को दोनों के बीच साझा किया जाएगा।
वर्तमान में जिले की मंडी व्यवस्था संतोषजनक नहीं है और मुख्य रूप से जिला मुख्यालय की सब्जी मंडी पर ही निर्भरता है, जिससे किसानों और व्यापारियों को दिक्कतें होती हैं।

