गोपालगंज जिले के उचकागांव प्रखंड में स्थित घोड़ा घाट मंदिर आस्था, रहस्य और पौराणिक मान्यताओं का अद्भुत संगम माना जाता है। यह प्राचीन मंदिर माँ भवानी को समर्पित है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा और धार्मिक महत्व इसे क्षेत्र का प्रमुख आस्था केंद्र बनाते हैं।
इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इसे तांत्रिक साधना की भूमि भी माना जाता है। मान्यता है कि यहां आज भी साधक विशेष पूजा और साधना करते हैं, जिससे यह स्थल अत्यंत शक्तिशाली और दिव्य माना जाता है। यही कारण है कि श्रद्धालु यहां विशेष मनोकामनाओं के साथ आते हैं।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जब माँ भवानी कामाख्या से थावे जाने के लिए निकली थीं, तब उन्होंने घोड़ा घाट पर विश्राम किया था। इसी वजह से इस स्थान को अत्यंत पवित्र माना जाता है और थावे मंदिर से इसका गहरा संबंध बताया जाता है।
एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान राम की बारात भी इसी मार्ग से गुजरी थी। कहा जाता है कि इसी क्षेत्र में लक्ष्मण जी ने अपने बाण से जल निकाला था, जिसे आज दाहा नदी या वाण गंगा के नाम से जाना जाता है।
हर वर्ष रामनवमी और नवरात्र के अवसर पर यहां भव्य मेले का आयोजन होता है, जहां हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा पूरी होती है, यही कारण है कि घोड़ा घाट मंदिर आज भी लोगों की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है।

