देवरिया जिले के सलेमपुर तहसील क्षेत्र के पड़री गजराज गांव में एक बड़ा जमीन घोटाला सामने आया है। करीब 30 वर्ष पहले मर चुके फेकू पुत्र सुखन की जमीन पर फर्जी तरीके से वरासत दर्ज कराकर 74.03 लाख रुपये की धनराशि हड़प ली गई।
जानकारी के अनुसार, फरवरी 2024 में ग्राम प्रधान के पति रामप्रताप की ओर से वरासत का आवेदन दिया गया था, जिसमें माया देवी को मृतक फेकू की पत्नी बताकर उसका नाम दर्ज कराया गया। जांच में मिलीभगत के संकेत मिलने के बाद डीएम दिव्या मित्तल के निर्देश पर मामले की गहन जांच कराई गई।
राजस्व टीम ने 26 और 27 फरवरी को स्थलीय और अभिलेखीय जांच की, जिसमें पाया गया कि गाटा संख्या 34 और 25 के मूल खातेदार फेकू थे। माया देवी ने फर्जी वरासत दर्ज कराकर गाटा संख्या 34 की कुछ जमीन 20 मई 2025 को पंचायत भवन निर्माण के लिए मुख्य विकास अधिकारी देवरिया के नाम 66,67,920 रुपये में बेच दी।
इसके अलावा इसी जमीन का कुछ हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना नवलपुर–सिकंदरपुर (एनएच-727बी) के लिए अधिग्रहित हुआ, जिसके बदले 7,35,478 रुपये का मुआवजा मिला। इस तरह कुल 74,03,398 रुपये की राशि प्राप्त हुई।
एसडीएम की जांच में वरासत दर्ज करने में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। जांच के बाद तत्कालीन लेखपाल अजय कुमार यादव को निलंबित कर दिया गया है, जबकि राजस्व निरीक्षक धर्मप्रकाश सिंह के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
साथ ही डीएम ने आरोपित माया देवी, लेखपाल अजय यादव, राजस्व निरीक्षक धर्मप्रकाश सिंह, ग्राम प्रधान इंदू देवी के पति रामप्रताप, पुत्र राहुल प्रताप सिंह और सफाईकर्मी रामराज प्रसाद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। डीएम ने पूरी धनराशि की वसूली माया देवी से करने और जमीन को राज्य सरकार में निहित करने की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है।

